फसल अवशेष जलाने पर हो सकता है रुपये 15000/-00 तक का जुर्माना, सेटेलाइट से हो रही है निगरानी
1 min readसंतकबीरनगर 21 अप्रैल , 2026 (सूचना विभाग)। उप कृषि निदेशक डॉ0 राकेश कुमार सिंह ने फसलों के अवशेष जलाने से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण की रोकथाम के लिए पराली प्रबन्धन के संबंध में जनपद के समस्त किसानों को जागरूक रहने के दृष्टिगत अवगत कराया है कि फसल अवशेष जलाये जाने से मिट्टी, जलवायु एवं मानव स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है तथा पर्यावरण भी दूषित होता है। फसल अवशेष जलाने से खेत के मिट्टी में रहने वाले लाभदायक सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते है जो मृदा की उर्वरता शक्ति बढ़ाने में सहयोगी होते हैं।
उन्होंने बताया कि मृदा की उर्वरता बनाए रखने एवं पर्यावरण में प्रदूषण को कम करने के लिए फसल अवशेष प्रबन्धन अति आवश्यक है। जिस हेतु पराली गौशाला में भेजने, पराली को भूमि में सड़ाकर उर्वरा शक्ति बढ़ाने हेतु कृषि विभाग से 50 से 80 प्रतिशत तक अनुदान पर उपलब्ध कृषि यंत्र यथा सुपर सीडर, स्ट्रा रीपर, मल्चर, पैड़ी स्ट्रा चापर, श्रब मास्टर, रोटरी स्लेशर, रिवर्सिबुल एम.बी. प्लाऊ, स्ट्रा रेक व बेलर आदि यंत्रों के प्रयोग से पराली का मल्य के रूप में प्रयोग करने, पराली को सी.बी.जी. प्लान/पैलेट यूनिट एवं औद्योगिक इकाईयों (कागज, गत्ता आदि की इकाई) के एफ.पी.ओ. एग्रीगेटर के माध्यम से भेजने आदि कार्यक्रम के द्वारा फसल अवशेष प्रबन्धन किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ अनिवार्य रूप से फसल अवशेष प्रबन्धन कृषि यन्त्र का प्रयोग किया जाय। कम्बाइन हार्वेस्टर के संचालक की जिम्मेदारी होगी कि फसल कटाई के साथ फसल अवशेष प्रबन्धन के यंत्रों का प्रयोग करे, अन्यथा कम्बाइन हार्वेस्टर को जब्त कर स्वामी के विरूद्ध नियमानुसार कड़ी कार्यवाही की जायेगी। फसल अवशेष को पशुपालन विभाग एवं ग्राम पंचायत विभाग के सहयोग से गोशाला में दान करने के लिए प्रेरित किया जाए।
उन्होंने बताया कि दिनांक 01 अप्रैल 2026 से 19 अप्रैल 2026 तक जनपद में कुल 723 फसल अवशेष जलाने की सूचना प्राप्त हुई है जिसका स्थलीय निरीक्षण कृषि एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा किया जा रहा है। ऐसे कृषक जिन्होंने गेहूं भूसे को अथवा उसकी डण्ठल को खेतों में जलाया है उनसे नियमानुसार पर्यावरण क्षतिपूर्ति की वसूली की जाने तैयारी की जा रही है क्षेत्रीय कर्मचारियों द्वारा सर्वेक्षण किया जा रहा है, जिसमें निर्धारित धनराशि वसूल की जानी है।
उप कृषि निदेशक ने इस संबंध में जनपद के सभी किसानों से अपील किया है कि अपने खेत में फसल अवशेष कदापि न जलाएं। फसल अवशेष जलाए जाने की घटना पाए जाने पर राजस्व विभाग द्वारा आर्थिक दण्ड लगाया जायेगा। दोषी कृषकों से वसूली यथा- 02 एकड से कम क्षेत्र के लिए रू0-2500/-, 02 से 05 एकड़ के लिए रूपए 5000/- तथा 05 एकड से अधिक के लिए 5000-15000/- तक पर्यावरण कम्पन्सेशन की वसूली एवं पुनरावृत्ति होने पर एफ0आई0आर0 आदि अन्य कार्यवाही की जायेगी।

